Thursday, 7 August 2008

एक हताश दिन...

(Written:4th Feb, 2006)

आज एक सपना और दफ़न किया,
एक आरजू की चिता जलाई है,
मुझे पागल मत समझो यारों,
मुझे दुनियादारी आई है॥

वो चाँद को छूता सपना था,
जैसा भी था पर अपना था,
पंखों को नोचा तो चीख पड़ा,
टूटी टांगों पर भी पर ढीठ खड़ा॥
फड-फड करती साँसों पर बस,
एक मज़बूत हथेली जमाई है,
मुझे पागल मत समझो यारों,
मुझे दुनियादारी आई है॥

वो कहते हैं थक गया मीत,
ख़ुद से जो मात यूँ खाई है।
क्या बोलूं उजियारी आखों को,
अपनी जो बस भर आयीं हैं।
सपने मेरे तू आगे चल,
तुझ संग अपनी भी विदाई है,
मुझे पागल मत समझो यारों,
मुझे दुनियादारी आई है!!!!

8 comments:

डा ’मणि said...

क्या हाल हैं जी


हिन्दी ब्लॉग्स के नये साथियों मे आपका बहुत स्वागत है
पहले तो एक सशक्त रचना के लिए आपको बहुत बधाई और फिर
चलिए अपने व ब्लॉग के परिचय के लिए कुछ पंक्तियाँ रख रहा हूँ देखिएगा

मुक्तक .......

हमारी कोशिशें हैं इस, अंधेरे को मिटाने की
हमारी कोशिशें हैं इस, धरा को जगमगाने की
हमारी आँख ने काफी, बड़ा सा ख्वाब देखा है
हमारी कोशिशें हैं इक, नया सूरज उगाने की .

और

कविता



मैं जो हूँ
मुझे वही रहना चाहिए

यानि
वन का वृक्ष
खेत की मेढ़
नदी की लहर
दूर का गीत , व्यतीत
वर्तमान में उपस्थित

भविष्य में
मैं जो हूँ
मुझे वही रहना चाहिये

तेज गर्मी
मूसलाधार वर्षा
कडाके की सर्दी
खून की लाली
दूब का हरापन
फूल की जर्दी

मैं जो हूँ ,
मुझे वही रहना चाहिये
मुझे अपना होना
ठीक ठीक सहना चाहिए

तपना चाहिए
अगर लोहा हूँ
तो हल बनने के लिए
बीज हूँ
तो गड़ना चाहिए
फूल बनने के लिए

मगर मैं
कबसे
ऐसा नहीं कर रहा हूँ
जो हूँ वही होने से डर रहा हूँ ..



आपकी प्रतिक्रियाओं की प्रतीक्षा मे
डॉ.उदय 'मणि'
हिन्दी की उत्कृष्ट कविताओं व ग़ज़लों के लिए देखें
http://mainsamayhun.blogspot.com

मीत..... said...

namaste uday ji,
pehle to dhanyawad aapke parichay aur panktiyon ke liye.. bahut hi achchhi hain...dharatl se judi ewan sajeev..
asha karta hun kaafi kuchh seekhne milega aapki kavitaon se..

--Amit

Hari Joshi said...

आपको दुनियादारी की समझ आई, आपकी रचना के माध्यम से आैरों को भी आए। इसी कामना के साथ शुभकामनाएं।

Amit K Sagar said...

बहुत अच्छा. लिखते रहिये.
---
यहाँ भी आयें;
उल्टा तीर

Divesh said...

Yun chaand ko chhute sapnon ko, duniya ka shikaar na banne do

Sapne se tumhaare duniya ka, kad chhota hai ye yaad rakho

Chita aarzoo ki jalaane se pehle
Nishaan uske mitaane se pehle

Jo wo aarzoo chehre par laayi thi,
Ek baar us muskaan ko yaad karo :)

Great going .. keep up the good work!

मीत..... said...

Thanks a lot Divesh!!!
This is exactly what I needed now :)

Geetanjali said...

'Suubhanallah'!
This is an excellent post..am looking forward to assimilate the other posts as well :-)
if you write in English, post them too.

Divesh said...

update requested!!!!!